शनिवार, 4 जुलाई 2015

रंज दिल में लिए साथ चलते रहे....

फासलों में ही दोनों फिसलते रहे,
रेत पर हम चले  पाँव जलते रहे।
तुम न आए सफर में यही गम तो है,
रोज हम अपने घर से निकलते रहे।
मेरी आँखें कहाँ दूर तक जा सकीं,
घूप में आईना जो मचलता रहे।
रात में ख्वाब आए जो टूटे मगर,
रंज दिल में लिए साथ चलते रहे।
नींद से आँख बोझल हुई इसलिए,
रात भर करवटें हम बदलते रहे।।

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