अपने
जिस्म की
नसों
में
रोज
ही मरती हूँ
कुछ कविताएँ डालकर
एक
मुद्दत से
मैं
रोई नहीं।
हर
बार मैंने तुम्हें
पास से गुजरते
हुए देखा है
तुम्हारी
यादों के पीपल
अभी
भी
मेरे
पूरे अस्तित्व को
अपनी
छांव की बाहों में
समेटे
हैं।
मैं
अपना यथार्थ
समय
के अंधेरे में
खोना
नहीं चाहती
बस
इसी फिक्र में
एक
मुद्दत से
मैं
रोई नहीं।
- रीभा तिवारी
फजलगंज
, (एस. बी. आई. के सामने)
सासाराम,
जिला-
रोहतास (बिहार)
पिन
कोड- 821115

