मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

मालूम है तुम्हें

अपने जिस्म की
नसों में
रोज ही मरती हूँ
 कुछ कविताएँ डालकर
एक मुद्दत से
मैं रोई नहीं
हर बार मैंने तुम्हें
 पास से गुजरते हुए देखा है
तुम्हारी यादों के पीपल
अभी भी
मेरे पूरे अस्तित्व को
अपनी छांव की बाहों में
समेटे हैं।
मैं अपना यथार्थ
समय के अंधेरे में
खोना नहीं चाहती
बस इसी फिक्र में
एक मुद्दत से
मैं रोई नहीं।
- रीभा तिवारी
फजलगंज , (एस. बी. आई. के सामने)
सासाराम, जिला- रोहतास (बिहार)

पिन कोड- 821115

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें