रविवार, 11 जनवरी 2015

तलाश है...

कुछ दूर है
कुछ पास है
सबको किसी न किसी की,
तलाश है।
यह जिंदगी
तो एक प्यास है
जिसे मिल गया
वह पा लिया
जो पा लिया,
उसे खो दिया।
जिसे नहीं मिला
वो हैरान है
व्यर्थ में परेशान है
यह प्यास वो है
जो बुझती नहीं
सागर में बूंदे
मिलती नहीं।
जो ढूँढ़ता इसे
ढूँढ़ता ही रहे
बिन राह चलता रहे
पास मंजिल रहे
फिर भी भटकता रहे
व्यर्थ ही प्यासा रहे ।
कुछ दूर है
कुछ पास है
हर किसी को किसी की,
 तलाश है.....।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें