मुकम्मल जिंदगी का मैं कोई एहसास होती हूँ
अँधेरी रात में जब भी तुम्हारे पास होती हूँ ।
कभी जुगनू चमकते हैं कभी बादल डराते हैं
सफर में जब भी चलती हूँ तेरा विश्वास होती हूँ।
मिला है जब कभी मुझसे तो इतना याद है मुझको
मैं उसके पास होती हूँ मैं उसकी खास होती हूँ ।
चले आओ कभी दिल से मेरे आँगन में तुम एक दिन
अभी सपनों में मैं हर दिन तुम्हारे पास होती हूँ ।
मेरी जुल्फों के सावन में मेरा दिल भीग जाता है
किसी टूटे हुए दर्पण का मैं एहसास होती हूँ ।

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