जार-जार रोती हैं आँखें
एक बियावान दृश्य सामने उभरता है
जिसकी परिक्रमा में
नींद आँखों से विदा नहीं माँगती
बल्कि परित्याग कर अनायास
दूर चली जाती है।
इस तलाश में कल जो नींद में आया था
और कुछ जो अपनी आहट से
मेरे एहसास पर हल्की-हल्की थपकी
देकर चला गया था,
उसी के वियोग में आँखों का रोना
निरंतर जारी है।
वह सपनों में आने वाला कौन था
जिसे मैं बार-बार समझने
और उसके आने के औचित्य को,
अपनी आंखों की सतह पर
उभर आए पदचिन्हों को
व्याख्यायित करने की
कोशिश कर रही हूँ क्योंकि
सपनों में किसी का आना
दुर्भाग्य और सुखद संयोग का
एक संकेत होता है।
मैं सपनों में आए उस
संकेत के साथ जीना चाहती हूँ ।
एक निश्चित अपने दायित्व की
नींव रखने हेतु।।
-रीभा तिवारी
एक बियावान दृश्य सामने उभरता है
जिसकी परिक्रमा में
नींद आँखों से विदा नहीं माँगती
बल्कि परित्याग कर अनायास
दूर चली जाती है।
इस तलाश में कल जो नींद में आया था
और कुछ जो अपनी आहट से
मेरे एहसास पर हल्की-हल्की थपकी
देकर चला गया था,
उसी के वियोग में आँखों का रोना
निरंतर जारी है।
वह सपनों में आने वाला कौन था
जिसे मैं बार-बार समझने
और उसके आने के औचित्य को,
अपनी आंखों की सतह पर
उभर आए पदचिन्हों को
व्याख्यायित करने की
कोशिश कर रही हूँ क्योंकि
सपनों में किसी का आना
दुर्भाग्य और सुखद संयोग का
एक संकेत होता है।
मैं सपनों में आए उस
संकेत के साथ जीना चाहती हूँ ।
एक निश्चित अपने दायित्व की
नींव रखने हेतु।।
-रीभा तिवारी

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