ए नारी
कहने को भले ही तू
आज बहुत आगे निकल आयी
चाँद तारे को छू आयी
फिर भी तू सुलझ नहीं पायी
जिन्दगी क्या है तेरी?
एक उलझी कहानी
कहने को हो स्वतंत्र
लेकिन घर हो या दफ्तर
टेबल हो या बिस्तर
तू हर जगह है परतंत्र
बचपन हो या जवानी
तेरी कौन सुने कहानी
तेरे पग-पग पर घटती हैं घटनाएं
कुछ कहती सुनती हो तो
समझाते हैं लोग ‘तुम कुछ मत कहो’
इसमें होगी सिर्फ तेरी बदनामी
बदनामी के ओट में
लोग करते हैं उपयोग/ उपभोग/मनमानी
ऐ नारी तेरी पहचान है
तू वस्तु नहीं जो भोगा जाए
फिर कूड़े-कचरे के ढेर में फेंक दिया जाए
तुम निर्जीव नहीं जो बार-बार
तेरी इच्छाओं का दमन हो।
क्यों समझती हो तुम अपने आपको कमजोर
तुम आगे आओ, आवाज लगाओ।
फिर कई आवाज तेरी
आवाज में समाहित होंगी
तेरे साथ-साथ कईयों की समस्या सामने होंगी
जिसका हल ढूंढ़ना होगा आसान,
तभी तो लोगों को तेरे सजीव
होने का होगा ज्ञान।
जो कहते हैं तुझे अज्ञान या फिर नादान
अपने को समझते हैं महान,
उनको तेरी औकात, तेरी ताकत
तेरे हौसले का
हो जाएगा आभास।
कहने को भले ही तू
आज बहुत आगे निकल आयी
चाँद तारे को छू आयी
फिर भी तू सुलझ नहीं पायी
जिन्दगी क्या है तेरी?
एक उलझी कहानी
कहने को हो स्वतंत्र
लेकिन घर हो या दफ्तर
टेबल हो या बिस्तर
तू हर जगह है परतंत्र
बचपन हो या जवानी
तेरी कौन सुने कहानी
तेरे पग-पग पर घटती हैं घटनाएं
कुछ कहती सुनती हो तो
समझाते हैं लोग ‘तुम कुछ मत कहो’
इसमें होगी सिर्फ तेरी बदनामी
बदनामी के ओट में
लोग करते हैं उपयोग/ उपभोग/मनमानी
ऐ नारी तेरी पहचान है
तू वस्तु नहीं जो भोगा जाए
फिर कूड़े-कचरे के ढेर में फेंक दिया जाए
तुम निर्जीव नहीं जो बार-बार
तेरी इच्छाओं का दमन हो।
क्यों समझती हो तुम अपने आपको कमजोर
तुम आगे आओ, आवाज लगाओ।
फिर कई आवाज तेरी
आवाज में समाहित होंगी
तेरे साथ-साथ कईयों की समस्या सामने होंगी
जिसका हल ढूंढ़ना होगा आसान,
तभी तो लोगों को तेरे सजीव
होने का होगा ज्ञान।
जो कहते हैं तुझे अज्ञान या फिर नादान
अपने को समझते हैं महान,
उनको तेरी औकात, तेरी ताकत
तेरे हौसले का
हो जाएगा आभास।

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