तुम्हारी याद आ गई
आकर रुला गई
तुम दूर ही सही
मगर पास हो, ऐसा लगा
झूठा ही सही
सच्चा लगा
ऐसा लगा,
कानों में कुछ गुनगुना सा गए
जिसे कुछ देर तक गाती रही
खुद को समझाती रही
नहीं वो नहीं
जो कुछ भी हुआ
वो सच था कहीं?
नहीं वो नहीं
आना ही था उसे तो
इस कदर रुलाता क्यों?
सपनों में आकर जगाता क्यों?
नींद मेरी आँखों से
दूर उड़ाता क्यों?
नहीं वो नहीं।।
आकर रुला गई
तुम दूर ही सही
मगर पास हो, ऐसा लगा
झूठा ही सही
सच्चा लगा
ऐसा लगा,
कानों में कुछ गुनगुना सा गए
जिसे कुछ देर तक गाती रही
खुद को समझाती रही
नहीं वो नहीं
जो कुछ भी हुआ
वो सच था कहीं?
नहीं वो नहीं
आना ही था उसे तो
इस कदर रुलाता क्यों?
सपनों में आकर जगाता क्यों?
नींद मेरी आँखों से
दूर उड़ाता क्यों?
नहीं वो नहीं।।

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