मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

नई राह, नई मंजिल

स्त्री शक्ति की प्रतीक दुर्गा या काली की पूजा-आराधना दरअसल इस पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों की महत्ता और गौरव की सामुदायिक स्वीकृति को ही रेखांकित करता है। एक अर्थ में यह स्त्री-शक्ति क्षमता, योग्यता का सम्मान तो है ही साथ ही परिवार, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों के सम्पोषण व योगदान के लिए समाज का उनके प्रति प्रकट कृतज्ञता भी है। परम्परागत छवि से परे व लीक से हटकर महिलाओं ने आज जीवन के तमाम क्षेत्रों में कामयाबी की नई बुलंदियों को छुआ है। चौतरफा अपनी जीत के परचम लहराये हैं।
आज इनकी जिन्दगी महज रसोई से घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक ही सीमित नहीं रही बल्कि इससे बहुत आगे जा चुकी है। कारपोरेट सेक्टर से लेकर अंतरिक्ष की अनंत-अथाह ऊंचाइयों तक आज महिलाओं ने अपने अद्भुत साहस, प्रतिभा, जीवट, क्षमता और कुशलता के अनगिनत जौहर दिखाए हैं। मेडिकल, इंजीनियरिंग, एज्यूकेशन, मैनेजमेंट, मीडिया से लेकर सेना, राजनीति, कला, प्रशासन, फिल्म, ग्लैमर व फैशन तक की दुनिया में अपने को साबित और स्थापित किया है। आज विकास और प्रगति का कोई भी क्षेत्र इनसे अछूता नहीं है। अब इनकी छवि डरी-सहमी सी अबला महिला की नहीं बल्कि नए जमाने की तेज-तर्रार, कम्प्यूटर फ्रेंडली, नेट सर्फिंग करती व फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती स्मार्ट, बोल्ड और स्ट्रांग वूमेन की है। संवेदनशीलता उनकी कमजोरी नहीं बल्कि शक्ति है। गांव हो या शहर शिक्षा, आधुनिकता, ग्लोबलाइजेशन, मीडिया व इंटरनेट क्रांति से आज हर वर्ग की महिलाओं में पर्याप्त जागरूकता और जीवन में कुछ कर गुजरने की महत्वाकांक्षा पैदा हुई है। छोटे शहरों और कस्बों तक की लड़कियां अब सुनहरे करियर के सपने संजोने लगी हैं। एज्यूकेशन और सूचना तकनीक ने उनके इन सपनों को पंख भी लगाए हैं। नतीजन आज वे पहले से कहीं ज्यादा स्ट्रांग, सेल्फ डिपेंडेड, कंफीडेंट और सेफ हैं। अपने क्वालीफिकेशन और जॉब की वजह से अब वे किसी के एहसानों की मोहताज या कृपा पात्र नहीं बल्कि बोल्ड और एक्टिव हैं। अब इनसे असहमत तो हुआ जा सकता है पर उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।
मॉर्डन महिलाओं की नई मंजिल अब सिर्फ हाउस वाइफ बनकर पूरी उम्र वह जिन्दगी गुजार देना नहीं है। किचेन, पति व बच्चों से आगे भी कुछ करने व बनने के सपने अब उनके भीतर हिलोरें लेने लगे हैं। अपनी एक स्वतंत्र पहचान और अलग वजूद अब बनाने-तलाशने लगी हैं ये। लड़कियों की पहली प्राथमिकता अब एज्यूकेशन और करियर है। काफी करियर कांसस हुई हैं अब लड़कियां। उनकी सोच पहले से कहीं अधिक प्रोफेशनल और जॉब ओरिएंटेड हुई है। सिर्फ हाउस वाइफ बनकर सारी उम्र गुजारना अब इन्हें गंवारा नहीं। अपनी एबिलिटी और टैलेंट निखारने-संवारने के लिए नए रास्ते बनाने-सोचने में किसी भी तरह आज ये लड़कों से पीछे नहीं बल्कि कई मामलों में उनसे अव्वल हैं। ‘जहां चाह, वहां राह’ की तर्ज पर इन्होंने अपनी मंजिल की राहों को खुद तराशा है। महिलाओं का सशक्तीकरण दरअसल सामाजिक विकास का ही एक अहम पार्ट है। चूंकि एक महिला पूरे परिवार की धुरी होती है। इसलिए स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का विकसित, सक्षम और सुशिक्षित होना बेहद जरूरी है। मॉडर्न वूमेन के सपने महज कपोल कल्पना नहीं बल्कि ठोस हकीकत बन चुके हैं। अपनी क्रिएटिव एनर्जी का बखूबी सटीक इस्तेमाल का हुनर आज भी इन मॉडर्न महिलाओं में है तभी हर जगह इनकी धाक जमती जा रही है। आज बड़ी संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजर, जर्नलिस्ट, कम्प्यूटर प्रोफेशनल, फैशन डिजाइनर मॉडल, अफसर बनकर दौलत व शोहरत पा रही हैं। इससे अब ये परिवार के लिए बोझ नहीं, सम्मान की वजह साबित होने लगी हैं। लड़कियों को कामयाब होते देख समाज का नजरिया ही नहीं बदला वरन् एक जागरूकता आई है। सफल महिलाएं दूसरी अन्य लड़कियों के रोल मॉडल बनकर उन्हें मोटिवेट को कहीं ज्यादा अच्छे माहौल, वक्त और अवसर मिलने लगे हैं। इससे महिलाओं के पक्ष में एक नई सामाजिक क्रांति आई है। आज महिला सशक्तीकरण की सबसे बड़ी वजह महिलाओं का इकोनॉमिकली सेल्फ डिपेंडेड होना है। यह आर्थिक सुरक्षा ही उन्हें जीवन में किसी भी मुश्किल का सामना करने का हौसला और शक्ति देता है। आमतौर पर महिलाओं की एक खूबसूरत और अहम खासियत इनका जज्बाती होना माना जाता है। पर इनकी संवेदनाएं क्रिएटिव एनर्जी से भरपूर होती हैं। अमूमन महिलाएं अपने निश्च्छल, सेवा, दया व संयम जैसे गुणों से कितनों के लिए जीने की वजह और प्रेरणास्रोत बनती आई हैं। कहते हैं कि अगर सिर्फ महिलाएं हों तो कहीं कोई जंग न हो। वास्तव में स्त्रियां धरती पर मानव जाति को कुदरत से प्राप्त ऐसी नेमत और उपहार है जिसका यह पूरा संसार हमेशा आभारी रहेगा, तभी तो औरत मां और दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती जैसे विविध रूपों में पवित्र, पूजनीय और महान है। एक स्त्री के लिए सबसे बड़ी व गौरवपूर्ण बात उसका मां होना है। जो मां जन्म देने के साथ ही उम्र भर संतान के कल्याण और सुरक्षा की दुआएं देती है, उसका दर्जा सारे संसार में सबसे ऊंचा कैसे नहीं हो सकता। मां के रूप में दुर्गा पूरे संसार के कल्याण व सुरक्षा की प्रतीक मातृशक्ति है। इसलिए स्त्री-शक्ति का यह रूप हमेशा से ही श्रेष्ठ और श्रद्घेय रहा है तथा रहेगा।

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